*सनातन धर्म मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है संपूर्ण विश्व के कल्याण एवं शांति के लिए भगवत चरित्र की कथाएं की जा रही है- स्वामीश्री रामकृष्णाचार्य जी*

कटनी, नई बस्ती स्थित श्री वेंकटेश सत्संग भवन में जगद्गुरु रामानुजाचार्य जी की शिष्य परंपरा के आचार्य श्री श्री 1008 श्री रामकृष्णाचार्य जी (युवराज) स्वामी द्वारा पत्रकार बंधुओ से सनातन धर्म पर चर्चा करते हुए बताया गया कि आज समस्त विश्व में विसंगतियां बढ़ती जा रही हैं और इन विसंगतियों को दूर करने के लिए साथ ही समाज में समरसता एवं शांति स्थापित की जाए इसके लिए हमें हमारे ऋषि मुनियों द्वारा बनाई गई मर्यादा का पालन करना बहुत ही जरूरी है लोग अपनी इच्छा से कार्य कर रहे हैं जबकि प्रत्येक मनुष्य को अपने गुरु जनों के सानिध्य में रहकर उनसे सही मार्ग पूछ कर शास्त्र आज्ञा अनुसार कार्य करना चाहिए समाज में प्रेम और सौहार्द का वातावरण बनाया जा सके जिससे समस्त विश्व में शांति स्थापित हो सके।
आज इसी हेतु जगह-जगह साधु, महात्माओ, कथाकार एवं संतो द्वारा भागवत चरित्र की कथाएं, सत्संग आदि कि जा रही हैं
उसी के एक रूपक के रूप में कटनी में श्री राम कथा का आयोजन श्री वेंकटेश सत्संग समिति द्वारा किया जा रहा है श्री राम कथा के माध्यम से कटनी शहर के नागरिकों को भगवान के चरित्र से अच्छी शिक्षा प्राप्त हो सके उसे वह अपने जीवन में उतर सके यही इस आयोजन की सार्थकता है।
सनातन धर्म मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है और इसी को ध्यान में रख करके अपने प्रतिदिन के क्रियाकलापों में जीवनचर्या में क्या-क्या करना आवश्यक है इन बातों को प्रभु श्री रामचंद्र जी ने उनके भाई श्री भरत जी ,श्री लक्ष्मण जी,श्री शत्रुघ्न जी और उनके पिता महाराजा दशरथ समकालीन आचार्य ऋषि मुनियों ने, भगवान के भक्त केवट, भक्त शबरी आदि द्वारा एक बड़ा उदाहरण हम सभी के समक्ष प्रस्तुत किया है ।
पत्रकार वार्ता में सनातन धर्म से लोगों द्वारा राजनीतिक लाभ के प्रश्न को पूछा गया
जिसका जवाब देते हुए युवराज स्वामी द्वारा कहा गया कि धर्म एवं राजनीति को अलग नहीं किया जा सकता किंतु जिस राजनीति से धर्म की रक्षा न की जा सके एवं उसका दुरुपयोग किया जावे वह किसी भी प्रकार से उचित नहीं है भगवान राम का जीवन इसका उदाहरण है उन्होंने धर्म की रक्षा के लिए समाज में शांति एवं कल्याण का ध्यान में रखते हुए शासन किया ।
पत्रकार वार्ता में कथाकरो द्वारा टोने टोटके एवं शीघ्र लाभ के लिए बताए गए साधनों पर जवाब देते हुए स्वामी रामकृष्णाचार्य जी द्वारा बताया गया कि शास्त्र में भगवत प्राप्ति के लिए कर्म प्रधान माना गया है और अपने कर्मों का त्याग करके इस तरह के टोने टोटके से किसी का भला नहीं होने वाला है यदि कोई व्यक्ति यह कर रहा है तो निश्चित रूप से वह समाज में भ्रम फैलाने का काम कर रहा है।
भगवान की प्राप्ति के लिए भगवान की भक्ति, भगवान के नाम का स्मरण, भगवान के चरित्रों का श्रवण यही श्रेष्ठतम उपाय है इसमें और कोई भी शॉर्टकट नहीं है ।

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