भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है श्रावण मास श्रावण चंद्र मास आरंभ – 11 जुलाई, शुक्रवार से

09 जुलाई 2025 – सनातन धर्म में श्रावण (सावन) मास का विशेष महत्व है। इस अवसर पर श्री पंडित मनोज कृष्ण जी शास्त्री ने बताया कि श्रावण मास की गणना दो विधियों से की जाती है—सौर मास (श्रावण संक्रांति) एवं चंद्र मास (श्रावण कृष्ण पक्ष)। दोनों ही विधियाँ मान्य हैं।

इस वर्ष श्रावण संक्रांति 16 जुलाई (बुधवार) को पड़ रही है। चंद्र मास 11 जुलाई शुक्रवार दिन से आरंभ हो रहा है—श्रावण कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से। अतः अधिकतर श्रद्धालु श्रावण चंद्र मास से ही श्रावण मास का पूजन आरंभ करेंगे। श्रावण चंद्र मास का समापन 09 अगस्त (शनिवार) को होगा।

श्रावण चंद्र मास के चार सोमवार इस प्रकार होंगे

पहला सोमवार – 14 जुलाई दूसरा सोमवार – 21 जुलाई
तीसरा सोमवार – 28 जुलाई
चौथा (अंतिम) सोमवार – 04 अगस्त

घर में ऐसे करें पार्थिव शिवलिंग पूजन:
यदि किसी कारणवश मंदिर जाना संभव न हो, तो घर में ही पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजन करें। इसके लिए किसी पवित्र नदी या सरोवर की मिट्टी में गाय का गोबर, गुड़, मक्खन और भस्म मिलाकर शिवलिंग तैयार करें। ध्यान रहे कि शिवलिंग की ऊँचाई 12 अंगुल से अधिक न हो। पूजन उपरांत इस शिवलिंग को जल में प्रवाहित कर देना चाहिए। मान्यता है कि पार्थिव शिवलिंग पूजन सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करता है।

पौराणिक मान्यता:
भगवान शिव ने स्वयं सनत कुमारों से कहा है कि उन्हें श्रावण मास विशेष प्रिय है। इसके पीछे कथा है कि माता सती ने अपने अगले जन्म में पार्वती रूप में हिमाचल व मैना की पुत्री बनकर जन्म लिया और युवावस्था में पूरे एक मास तक निराहार रहकर कठोर व्रत किया, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनसे विवाह किया। तभी से श्रावण मास शिव को अत्यंत प्रिय हो गया।

यह भी मान्यता है कि चातुर्मास के काल में भगवान विष्णु विश्राम को चले जाते हैं और तब संसार के पालन का उत्तरदायित्व शिव-पार्वती संभालते हैं। इस कारण श्रावण मास में शिव पूजन का विशेष महत्व है, विशेषकर श्रावण शिवरात्रि पर।

पूजन सामग्री और विधि:
श्रावण सोमवार को या मास भर व्रत करने वालों को सुबह स्नान कर रुद्राक्ष की माला पहननी चाहिए, भस्म का तिलक करना चाहिए और भगवान शिव का ध्यान करते हुए पूजन करना चाहिए। पूजन में गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, बिल्व पत्र, पुष्प, धूप, दीप, चंदन, नैवेद्य, फल, आक-धतूरे के पुष्प, चावल आदि अर्पित करें।
“ॐ नमः शिवाय” का जाप करें, रुद्राभिषेक, शिव स्तोत्र, शिव कथा, शिव पुराण श्रवण, रात्रि जागरण आदि से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।

मंगलवार का महत्व:
श्रावण मास के प्रत्येक मंगलवार को महिलाएं श्री मंगलागौरी व्रत करती हैं। यह व्रत विवाह, संतान सुख और सौभाग्यवृद्धि में सहायक माना गया है।

व्रत की सावधानियाँ और स्वास्थ्य दृष्टिकोण:
श्रावण मास में व्रत करने वालों को तामसिक वस्तुओं का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। नशे से दूर रहना चाहिए। फलाहार करें और शरीर की क्षमता के अनुसार उपवास करें। इससे शरीर व मन दोनों पवित्र रहते हैं।

श्रावण मास शिवभक्तों के लिए एक महापर्व है। इस अवसर पर श्रद्धा, आस्था एवं नियमपूर्वक व्रत-पूजन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और समस्त पापों का नाश होता है।

ज्योतिर्विद रत्न वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री मो,9993874848

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