विवस्वत सप्तमी आज आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को विवस्वत सप्तमी के रुप में मनाई जाती है। इस वर्ष 2025 में विवस्वत सप्तमी तिथि 02 जुलाई को मनाई जाएगी।

विवस्वत सप्तमी आज

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को विवस्वत सप्तमी के रुप में मनाई जाती है। इस वर्ष 2025 में विवस्वत सप्तमी तिथि 02 जुलाई को मनाई जाएगी।
इस दिन सूर्य देव की उपासना का विशेष महत्व बताया जाता है। सूर्य के अनेकों नाम हैं जिनमें से एक नाम विवस्वत भी कहलाता है। प्रत्येक वर्ष की सप्तमी में सुर्य के पूजन की तिथि के लिए भी अत्यंत शुभदायक मानी गई है। ऎसे में आषाढ़ मास की सप्तमी के दिन भी सूर्य पूजन का विधान रहा है।

विवस्वत सप्तमी महत्व

विवस्वत के संदर्भ को लेकर अनेक कथाएं प्रचलित होती हैं। वैदिक साहित्य में मनु को विवस्वत् का पुत्र माना गया है, एवं इसे ‘वैवस्वत’ नाम दिया गया है। सूर्य का संबंध इसके साथ जुड़ने कारण ही इस दिन सूर्य उपासना का भी बहत मह्त्व रहा है। इस दिन विवस्वत मनु का पूजन होता है। इस दिन मनु कथा का श्रवण किया जाता है। वैवस्वत मनु के नेतृत्व में सृष्टि का सूत्रपात होता है। इसी से श्रुति और स्मृति की परम्परा चल पड़ी। विवस्वत से ही सूर्य वंश का आरंभ होता है जिसमें श्री राम का जन्म हुआ जो विष्णु के अवतार स्वरुप पृथ्वी पर आते हैं।

विवस्वत सप्तमी की पूजा विधि

विवस्वत सप्तमी के दिन सूर्यदेव का पूजन करने से सभी सुख और परेशानियां समाप्त होती हैं। स्वास्थ्य समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए इस दिन अवश्य ही सूर्य देव का पूजन बहुत ही सकारात्मक होता है। सरकार की ओर से यदि कोई परेशानी मिल रही है या फिर कोई प्रोपर्टी से संबंधित अगर कोई मामला हो तो वह भी इस स्थिति में दूर हो सकता है।

विवस्वत सप्तमी के दिन सूर्य उदय से पुर्व उठ्ना चाहिये।
स्नान करने के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिये।
सूर्य को ज्ल देते समय जल में रोली, अक्षत और चीनी व लाल फूल जल में डालकर अर्घ्य देना चाहिये।
‘ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम:’ मंत्र का जाप करना चाहिये।
इस दिन सिफ मीठी वस्तुओं का सेवन करना चाहिए।
हलवा बनाकर सूर्य देव को भोग लगाना चाहिए।
आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ एवं सूर्याष्टक का पाठ करना चाहिए।

सूर्य पूजा से मिलता है लाभ

मान्यता है कि, सुबह उगते हुए सूर्य को प्रणाम करने और जल चढ़ाने से आत्मविश्वास बढ़ता है। सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार, सप्तमी तिथि पर सूर्य को जल चढ़ाने और पूजा करने से रोग दूर होती हैं।

ज्योतिर्विद रत्न वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री मो,9993874848

Please follow and like us:
Pin Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enjoy this blog? Please spread the word :)