नाग पंचमी आज हिंदू धर्म में नाग पंचमी के त्योहार का बहुत खास महत्व होता है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाई जाती है।

नाग पंचमी आज

हिंदू धर्म में नाग पंचमी के त्योहार का बहुत खास महत्व होता है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाई जाती है। वहीं, कुछ जगहों पर नाग पंचमी सावन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर भी मनाई जाती है। इस दिन लोग नाग देवता की विधि-विधान से पूजा करते हैं। ऐसा करने से बेहद शुभ फल की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने से जीवन के दुखों से निजात मिल सकती है और आर्थिक तंगी भी दूर होती है। नाग देवता को भगवान शिव का गण भी माना जाता है। ऐसे में उनकी पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और उनकी विशेष कृपा भक्तों पर बनी रहती है। वहीं, इस दिन बहुत शुभ संयोग बन रहा है, जिससे नाग पंचमी और खास रहेगी।

नाग पंचमी के दिन बन रहे हैं ये शुभ योग

इस साल नाग पंचमी के दिन 2 बहुत ही शुभ योग बन रहे हैं, जो इस दिन और भी ज्यादा खास बना रहे हैं। बता दें कि कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि के दिन मनाई जाने वाली नाग पंचमी को सौभाग्य योग बन रहा है। वहीं, शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाने वाली नाग पंचमी के दिन शिव योग बना रहा है। ऐसे में नाग देवता और भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं।

नाग पंचमी तिथि और शुभ मुहूर्त

इस साल कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि 15 जुलाई को सूर्योदय के समय से हो रही है। ऐसे में कुछ स्थानों के लोग 15 जुलाई को नाग पंचमी मनाएंगे। इसी दिन से मंगला गौरी व्रत की शुरुआत भी हो जाती है। वहीं, मधुश्रावणी व्रत भी शुरू होता है, जो सावन में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि तक चलता है। इसका समापन 27 जुलाई को 10 बजकर 40 मिनट पर होगा। सावन में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन ही यानी 27 तारीख को हरियाली तीज मनाई जाती है। इसके अलावा, शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि इस सावन में 28 जुलाई को रात में 11 बजकर 25 मिनट पर शुरू हो जाएगी और इसका समापन 29 तारीख को रात में 12 बजकर 47 मिनट पर होगा। ऐसे में कुछ स्थानों पर नाग पंचमी 29 तारीख को मनाई जाएगी।

नाग पंचमी 2025 पूजा विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करने के बाद साफ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद, पास के शिवालय में जाकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें और व्रत का संकल्प लें। अब अपने घर, रसोई और मंदिर के दरवाजे के दोनों ओर खड़िया से पुताई करके कोयले से नाग देवता का चिन्ह बना लें। अगर ऐसा संभव न हो, तो आप नाग देवता की तस्वीर का प्रयोग भी कर सकते हैं। फोटो लगाने के बाद घर में नाग देवता विधि-विधान से पूजा करें और फिर पास के खेत या ऐसे स्थान पर दूध का कटोरा रखकर आ जाएं जहां सांप आ सकते हैं। इस दिन सेवई और चावल बनाने का भी खास महत्व होता है। अब नाग देवताओं को दूध और जल से स्नान कराएं। साथ ही, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करें। अब अंत में आरती करें और नाग पंचमी की कथा का पाठ भी अवश्य करें। इससे बेहद शुभ फल की प्राप्ति होती है।

नाग पंचमी का क्या है महत्व?

सावन के महीने में सांप भू गर्भ से निकलकर भू तल पर आ जाते हैं। माना जाता है कि नाग किसी व्यक्ति को नुकसान न पहुंचाएं, इसलिए नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा-अर्चना की जाती है। कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को बिहार, बंगाल, उड़ीसा, राजस्थान आदि स्थानों पर नाग देवता की पूजा की जाती है। वहीं, शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को देश के अन्य राज्यों में नाग पंचमी मनाई जाती है। शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, नाग देवता स्वयं पंचमी तिथि के स्वामी हैं। ऐसे में इस दिन उनकी पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। मान्यता है कि नाग पंचमी पर विधि-विधान से नाग देवता की पूजा करने से कुंडली में मौजूद राहु व केतु से जुड़े दोषों से मुक्ति मिल सकती है। नाग देवता को पाताल लोक का भी स्वामी बताया गया है। ऐसे में पंचमी तिथि के दिन भूमि की खुदाई भूलकर भी नहीं करनी चाहिए।
ज्योतिर्विद रत्न वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री मो,9993874848

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