ग्रीन गणेश जागरूकता कार्यक्रम शासकीय कन्या महाविद्यालय, में 

कटनी।शासकीय कन्या महाविद्यालय, में प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात के मार्गदर्शन में इको क्लब के तत्वावधान में “ग्रीन गणेश जागरूकता” विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और छात्राओं को पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमा निर्माण के प्रति जागरूक करना था। वेबिनार: गणेश मूर्ति निर्माण प्रक्रिया
कार्यक्रम के प्रथम चरण में इको क्लब पर्यावरण मंत्रालय द्वारा वेबिनार का आयोजन किया गया, जिसमें छात्राओं को गणेश मूर्ति निर्माण की पर्यावरण-अनुकूल प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से बताया गया। विशेषज्ञ डॉ. दिलीप चक्रवर्ती ने प्राकृतिक और जैविक सामग्रियों के उपयोग पर जोर देते हुए पारंपरिक और पर्यावरण के लिए हानिकारक सामग्रियों के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला। इस सत्र ने छात्राओं में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यशाला: इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा निर्माण
वेबिनार के पश्चात्, महाविद्यालय में एक कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें छात्राओं ने प्राकृतिक सामग्रियों जैसे मिट्टी, हल्दी, पीपल के पत्ते, और सुपारी का उपयोग करके इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएँ बनाईं। प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात ने छात्राओं का मार्गदर्शन करते हुए बताया कि ऐसी प्रतिमाएँ पर्यावरण के लिए अनुकूल होती हैं, क्योंकि ये आसानी से विघटित हो जाती हैं और जल प्रदूषण को रोकती हैं। इस गतिविधि ने छात्राओं में रचनात्मकता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उत्साह को बढ़ाया।
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में श्रीमती ज्योति सिंह चौहान प्रभारी महाप्रबंधक जिला व्‍यापार एवं उद्योग केन्‍द्र कटनी, अनमिका जैन, और शकील अहमद उपस्थित रहे। महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. विमला मिंज, डॉ. प्रतिमा सिंह, डॉ. संजयकांत भारद्वाज, भीम बर्मन, प्रेमलाल कॉवरे, डॉ. वदना चौहान, श्रीमती मीनाक्षी वर्मा, डॉ. अनिका वालिया, श्रीमती श्वेता कोरी, श्रीमती प्रियंका सोनी, और आंजनेय तिवारी ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज की।
कार्यक्रम का मंच संचालन इको क्लब प्रभारी डॉ. रीना मिश्रा ने कुशलतापूर्वक किया। इको क्लब की सदस्य श्रीमती स्मृति दहायत और श्रीमती सुषमा वर्मा का विशेष सहयोग रहा, जिसने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
यह आयोजन पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और छात्राओं को स्थायी प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रेरित करने में सफल रहा। ग्रीन गणेश जागरूकता कार्यक्रम ने न केवल पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव जगाया, बल्कि सामुदायिक सहभागिता और रचनात्मकता को भी प्रोत्साहित किया।

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