शरद् पूर्णिमा 06 अक्टूबर सोमवार को

कटनी।रात्रि आश्विन शरद् पूर्णिमा का व्रत 06 अक्टूबर (सोमवार) को होगा और दिवा पूर्णिमा व्रत 07 अक्टूबर (मंगलवार) को होगा।

सुख, समृद्धि एवं लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए शरद् पूर्णिमा पर अपनी राशि के अनुसार करें उपाय।

नेत्रज्योति बढ़ाने के लिए शरद् पूर्णिमा की रात्रि में 25 से 30 मिनट तक चन्द्रमा को देखें।

आश्विन पूर्णिमा को शरद् पूर्णिमा भी कहते हैं। शरद् पूर्णिमा के विषय में पंडित श्री मनोज कृष्ण शास्त्री जी ने बताया कि आश्विन मास की पूर्णिमा वर्षभर की सभी पूर्णिमाओं में श्रेष्ठ मानी गई है। इसे शरद् पूर्णिमा कहा जाता है। इस पूर्णिमा को शरदोत्सव, रास पूर्णिमा, कोजागर पूर्णिमा एवं कमला पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।

सुख, सौभाग्य, आयु, आरोग्य और धन-संपदा की प्राप्ति के लिए इस दिन प्रातः स्नान, आत्मपूजा कर श्रीगणेश, लक्ष्मीनारायण और इष्टदेव का विशेष पूजन करना चाहिए तथा रात्रि में चन्द्रमा को अर्घ्य देकर ही भोजन करना चाहिए।

शरद् पूर्णिमा तिथि :

प्रारंभ : 06 अक्टूबर सोमवार दोपहर 12:24 बजे

समाप्ति : 07 अक्टूबर मंगलवार प्रातः 09:18 बजे

अतः शरद् पूर्णिमा का पर्व 06 अक्टूबर (सोमवार) को मनाया जाएगा।

रात्रि आश्विन शरद् पूर्णिमा का व्रत 06 अक्टूबर (सोमवार) को होगा और दिवा पूर्णिमा व्रत 07 अक्टूबर (मंगलवार) को होगा।

पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों संग महारास रचाया था, इसलिए इसे रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। चन्द्रदेव अपनी 27 पत्नियों (नक्षत्रों) के साथ पूर्ण कलाओं से युक्त होकर इस रात सभी लोकों पर शीतलता और अमृत की वर्षा करते हैं।

शरद् पूर्णिमा की रात्रि चन्द्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है। मान्यता है कि इस रात चन्द्रमा 16 कलाओं से संपन्न होकर अमृत वर्षा करता है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती है। इस रात लोग परंपरा के अनुसार मेवे डालकर खीर बनाते हैं और उसे खुले आकाश तले चन्द्रमा की रोशनी में रखते हैं। अगले दिन स्नान कर भगवान को भोग लगाकर खीर का प्रसाद ब्राह्मणों या कन्याओं को अर्पित करने के बाद परिवार में वितरित किया जाता है। इसे खाने से अनेक रोग दूर होते हैं। चांदी के पात्र में खीर रखना विशेष फलदायी है।

शरद् पूर्णिमा की रात जागरण का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस रात माता लक्ष्मी यह देखने निकलती हैं कि कौन जाग रहा है। जो जागते हैं, उन्हें माता लक्ष्मी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

लक्ष्मी की प्राप्ति हेतु विशेष उपाय

शरद् पूर्णिमा की रात घर में घी के 21 दीपक जलाएं।

श्रीसूक्त के 21 पाठ करें।

मोती अथवा स्फटिक माला से ॐ सों सोमाय नमः मंत्र का जप करें।

कमलगट्टे की माला से ॐ श्रीं मंत्र की 21 माला जाप करें।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र, कनकधारा स्तोत्र, विष्णु सहस्रनाम और मधुराष्टकं का पाठ करें।

नेत्रज्योति बढ़ाने हेतु 25–30 मिनट तक चन्द्रमा को देखें।

शरद् पूर्णिमा की रात काम-विलास में लिप्त होने से विकलांग संतान या गंभीर रोग होने का भय रहता है।

लंकाधिपति रावण शरद् पूर्णिमा की रात दर्पण द्वारा चन्द्रमा की किरणें अपनी नाभि पर ग्रहण करता था, जिससे उसे पुनर्योवन शक्ति मिलती थी।

गर्भवती महिला की नाभि पर जी चन्द्रमा की चांदनी पड़ने से गर्भ पुष्ट होता है। शरद् पूर्णिमा की चांदनी का विशेष महत्व है।

व्रत का महत्व

व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

विवाहित स्त्रियों को संतान सुख मिलता है।

माताओं द्वारा व्रत रखने से बच्चों की दीर्घायु होती है।

कन्याओं को मनचाहा पति मिलता है।

राशि अनुसार उपाय

मेष : कन्याओं को खीर खिलाएं और दूध में धुले चावल बहते जल में प्रवाहित करें।

वृष : दूध, दही और गाय का घी मंदिर में दान करें।

मिथुन : चांदी, दूध और चावल का दान करें।

कर्क : गाय के दूध से बनी मिठाई गरीबों को दान करें।

सिंह : मंदिर में गुड़ का दान करें।

कन्या : कन्याओं को खीर खिलाएं।

तुला : मंदिरों में दूध, आटा, चावल व घी का दान करें।

वृश्चिक : कन्याओं अथवा ब्राह्मणों को दूध, चावल व चांदी का दान करें।

धनु : पीले वस्त्र, हल्दी, चने की दाल मंदिर में दान करें।

मकर : बहते पानी में दूध प्रवाहित करें।

कुंभ : हनुमान चालीसा का पाठ करें एवं दृष्टिहीनों को भोजन कराएं।

मीन : ब्राह्मणों और कन्याओं को भोजन कराएं।

ज्योतिर्विद रत्न वास्तु दैवज्ञ पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री मो,9993874848

Please follow and like us:
Pin Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enjoy this blog? Please spread the word :)