*भगवान की सेवा करना ही मनुष्य का सबसे अच्छा लक्षण है श्रीरामायण जी प्रभु श्री राम के बताए गए मार्ग में चलने का ग्रंथ है- स्वामी श्रीरामकृष्णाचार्य*

कटनी सीतारामाचार्य की गोष्टी अंतर्गत श्री वेंकटेश सत्संग समिति कटनी के तत्वाधान में श्री राम कथा के द्वितीय दिवस
व्यास पीठ पर विराजमान इटारसी से पधारे श्री श्री 1008 स्वामी श्री रामकृष्णाचार्य जी द्वारा बताया कि किस तरह संस्कारों का हमारे जीवन में बहुत ही महत्व है प्रभु श्री राम जो की परम पिता परमेश्वर थे उनके जन्म के पश्चात ही दशरथ जी ने शास्त्र नीति अनुसार उनके संस्कार कराये गये.
भगवान के जन्म के पश्चात संपूर्ण ब्रह्मांड के समस्त देवतागण उनके दर्शन के लिए अयोध्या नगरी पधारे. पिता दशरथ जी एवं समस्त रानियां पुत्रों को तरह-तरह का लाड़ दुलार करते नहीं थकते हैं.
आज संस्कारों की कमी समाज में दिखाई पड़ रही है जिसके कारण समाज में जो अनैतिक कार्य हो रहे हैं यह उसी का परिणाम है परिवार में बालक -बालिकाओ मे भी संस्कारों की कमी के कारण गलत मार्ग में जा रहे हैं उन्हें हमारे ग्रंथो को पढ़ाने की आवश्यकता है क्योंकि वह आने वाला भविष्य है यदि आज उन्हें अच्छे संस्कार नहीं दिए गए तो आने वाला भविष्य खतरे में रहेगा.
प्रभु श्री रामचंद्र जी समेत समस्त भाइयों को बचपन से ही शास्त्र एवं शस्त्र दोनों का ही ज्ञान दिया गया.
ऋषि विश्वामित्र अयोध्या नगरी में पधारकर राजा दशरथ से अपने अनुष्ठान पूरा करने के लिए रामचंद्र जी को साथ ले जाने की बात रखते हैं किंतु राजा दशरथ उनकी आयु छोटी की बात कर स्वयं साथ चलने की बात कहते हैं.
किंतु विश्वामित्र जी द्वारा राजा दशरथ जी से भगवान राम को ही ले जाने का अनुरोध किया जाता है
यहां पर व्यास पीठ से इस प्रसंग के मर्म को समझाते हुए बताया गया कि हमें जीवन की कठिनाइयों का चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने बच्चों को बालपन से ही तैयार करना चाहिए उन्हें हर परिस्थिति का सामना करने के लिए साहसी बनाना चाहिए जिससे कि विपत्ति आने पर वह उससे घबराएं नहीं अपितु उसका सामना कर सके.
व्यास पीठ से स्वामी रामकृष्णाचार्य जी द्वारा ताड़का वध, अहिल्या उद्धार सहित अन्य प्रसंगों का विस्तृत वर्णन किया.
कथा के तृतीय दिवस धनुष यज्ञ एवं श्री सीता स्वयंवर के सुंदर प्रसंग का वर्णन किया जावेगा.
श्री वेंकटेश सत्संग समिति कटनी द्वारा संपूर्ण कटनी नगर की जनता से अधिक से अधिक संख्या में पधारकर श्री राम कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित करने का आग्रह किया गया है ।

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