*माता अनुसुइया ने सीता जी को जो पतिव्रत का उपदेश किया है वह आज माताओ को अपनी बेटीयो को अवश्य देना चाहिए आज समाज में जो विकृति आ रही है उससे समाज ओर परिवार में विघटन हो रहा है स्वामी श्रीरामकृष्णाचार्य*

*माता अनुसुइया ने सीता जी को जो पतिव्रत का उपदेश किया है वह आज माताओ को अपनी बेटीयो को अवश्य देना चाहिए आज समाज में जो विकृति आ रही है उससे समाज ओर परिवार में विघटन हो रहा है स्वामी श्रीरामकृष्णाचार्य
कटनी श्रीसीतारामाचार्य गोष्टी अंतर्गत श्री वेंकटेश सत्संग समिति कटनी के तत्वाधान में शंभू टॉकीज रोड स्थित पुराने आयकर कार्यालय मे श्री राम कथा के छठवे दिवस
व्यास पीठ पर विराजमान इटारसी से पधारे श्री श्री 1008 स्वामी श्री रामकृष्णाचार्य जी द्वारा
भगवान श्री राम जी के चित्रकूट निवास का वर्णन करते हुए बताते है कि भरत जी के जाने के बाद भगवान के मन में यह बात आयी कि ऋषि मुनि चित्रकूट छोड़कर जा रहे है और इस बात को जब उन्होंने ऋषि मुनियो से पूछा तब उन्होंने बताया कि राक्षसों के कारण हमारी पूजा में व्यवधान आ रहा है प्रभु ने यह सुन उनकी रक्षा का प्रण लिया।
आगे अत्रि ऋषि के आश्रम में भगवान का आगमन हुआ जहा पर भगवान ने सीता जी से कहा कि वह माता अनसूया से उपदेश ग्रहण करें ,अनसूया जी ने सीता जी को पतिव्रत धर्म का उपदेश किया ।

व्यास पीठ से बताया गया कि आज वास्तव में
माता अनुसुइया ने सीता जी को जो उपदेश किया है वह माताओ को अपनी बेटीयो को अवश्य देना चाहिए ,
यह दिया जाएगा तो परिवारों में विघटन नहीं होगा .एक पतिव्रता स्त्री के लिए पति की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है ।
आज आत्महत्या की घटना बढ़ रही है इसका क्या कारण है हमें इस पर विचार करना चाहिए इसे समझने की कोशिश करना चाहिए ।
व्यास पीठ से स्वामी रामकृष्णाचार्य जी द्वारा कथा में आगे माता सीता हरण का वर्णन करते हुए बताया कि आज महिलाओ को अपनी मर्यादाओ का पालन करना बहुत आवश्यक है मर्यादा लाँघने पर हर जगह रावण हरण के लिए उपस्थित है ।
कथा में जटायु मोक्ष्य का वर्णन के पश्चात माता सबरी जी के चरित्र का वर्णन किया और बताया कि यदि शबरी जी जैसा प्रेम होगा तो भगवान स्वयं चलकर आपके घर भोजन ग्रहण करने आएंगे ।
अगले दिवस श्रीराम हनुमान मिलन,सुग्रीव शरणागति के प्रसंगों की कथा का वर्णन किया जाएगा ।
श्री वेंकटेश सत्संग समिति कटनी द्वारा संपूर्ण कटनी नगर की जनता से अधिक से अधिक संख्या में पधारकर श्री राम कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित करने का आग्रह किया गया है ।

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