ई-आफिस कार्यप्रणाली के मामले में कटनी प्रदेश के 10अग्रणी जिलों में शामिल कलेक्टर श्री यादव द्वारा ई-आफिस के क्रियान्वयन की सतत् की जाती है समीक्षा

कटनी।प्रशासनिक कार्यों को तेज और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर श्री दिलीप कुमार यादव के निर्देश पर कटनी जिले में ई-ऑफिस सिस्टम पर तेजी से काम हो रहा है। ई-आफिस कार्यप्रणाली अपनाने और इसके क्रियान्वयन को मूर्तरूप देने के मामले में कटनी जिला प्रदेश के 10 सर्वश्रेष्ठ अग्रणी जिलों में शामिल है।सतत् समीक्षा

कलेक्टर श्री यादव द्वारा समय-सीमा बैठक में नियमित तौर पर ई-आफिस कार्यप्रणाली की समीक्षा की जाती है। कलेक्टर श्री यादव कहते हैं कि जिले में ई-ऑफिस के क्रियान्वयन का मुख्य उद्देश्य सभी विभागों के भीतर प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाना है। जिससे दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी । साथ ही ई-ऑफिस का प्रयोग कर प्रौद्योगिकी को अपनाते हुए प्रशासनिक प्रक्रियायें भी और अधिक सुव्यवस्थित हों जायेंगी।54 विभागों में ई-आफिस कटनी जिले के 54 विभागों और कलेक्ट्रेट की शाखाओं में ई-आफिस कार्यप्रणाली से कार्य शुरू किया जा चुका है। यहां अब तक 5 हजार 322 ई-फाईलें आनलाइन चलाईं गई है।जबकि 1 हजार 819 ई -फाईल क्रियेट की जा चुकी है। ई- रिसिप्ट 2 हजार 866 और 6 हजार 613 ई -रिसीप्ट भी हो चुके हैं।प्रशिक्षण
इसके लिए जिला सूचना विज्ञान अधिकारी श्री प्रफुल्ल श्रीवास्तव द्वारा विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को तीन चरणों में प्रशिक्षण भी दिया गया है। इसके अलावा विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को किसी भी प्रकार की असुविधा और समझने में आने वाली परेशानी व समस्या को दूर करने में भी डी आई ओ श्री श्रीवास्तव द्वारा तकनीकी परामर्श प्रदान किया जाता है। ई-आफिस से आशय साफ है कि कागजी नोटशीट फाइलें नहीं चलेंगी, उनकी बजाए फाइलें चरणबद्ध तरीके से ऑनलाइन मूव होंगी। मतलब पूरी प्रक्रिया पेपरलेस होगी।

कटनी जिले में ई-आफिस कार्यप्रणाली की शुरुआत से सुशासन की दिशा में अभूतपूर्व तथा प्रभावी प्रगति का परिचायक है। इसके तहत पारदर्शिता, तत्परता और जनकल्याणकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का लक्ष्य पूर्ण होगा।क्या है ई-ऑफिस प्रणाली
ई-ऑफिस, ऑनलाइन प्रणाली है। इसमें अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक कम्प्यूटर पर बैठकर अपनी फाइलें निपटाएंगे। इससे यह पता चल जाएगा कि कौन सी फाइल किस के पास लंबित है। पुरानी नस्तियों को भी इसमें ढूंढा जा सकेगा। इससे शासकीय कार्य तेजी से संपादित हो सकेंगे। उच्च स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग भी आसान होगी।

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