*आस्था की 5 किलोमीटर लंबी डोर, मां शारदा के चरणों तक पहुंची चुनरी यात्रा नंगे पांव भक्तों की श्रद्धा को मिला सम्मान, नगर ने सेवा और समर्पण से बिछाई ठंडक की राह*

कटनी।विजयराघवगढ़ की पावन धरती पर उस समय भावनाओं का सागर उमड़ पड़ा जब नन्हवाराकला से लगभग 5 किलोमीटर लंबी आस्था की चुनरी यात्रा मां शारदा के दरबार की ओर बढ़ी। तेज धूप और तपती गर्मी भी श्रद्धालुओं के विश्वास को डिगा न सकी नंगे पांव सिर पर चुनरी का भार और हृदय में अटूट भक्ति लिए भक्त मां के जयकारों के साथ आगे बढ़ते रहे।यह चुनरी यात्रा केवल एक परंपरा नहीं बल्कि आस्था समर्पण और विश्वास की जीवंत मिसाल बन गई। सैकड़ों हजारों श्रद्धालुओं ने मिलकर 351 मीटर लंबी चुनरी को संभाला और नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए नदी पार स्थित मां शारदा मंदिर तक पहुंचाया। हर कदम पर भक्ति की गूंज और मां के प्रति अटूट प्रेम का अद्भुत संगम देखने को मिला।नगर में प्रवेश करते ही समाजसेवी हरीश दुबे ने श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत किया। उनके इस स्नेहिल स्वागत ने यात्रा की थकान को पल भर में भुला दिया। वहीं नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती राजेश्वरी हरीश दुबे के निर्देश पर पूरे मार्ग में पानी का छिड़काव कराया गया जिससे तपती सड़कों पर चल रहे भक्तों के पैरों को ठंडक और राहत मिल सके यह दृश्य सेवा और संवेदनशीलता का अद्भुत उदाहरण बना। यात्रा के दौरान नगर के व्यापारियों ने भी सेवा भाव दिखाते हुए जगह जगह शीतल जल की व्यवस्था की जिससे श्रद्धालुओं को राहत मिली। हर कोई अपने अपने स्तर पर मां की सेवा में समर्पित नजर आया।समाजसेवी हरीश दुबे ने इसे नगर के लिए गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि नन्हवाराकला से हजारों श्रद्धालुओं द्वारा मां शारदा को चुनरी अर्पित करने आना हमारे लिए सौभाग्य की बात है।जब चुनरी अंततः मां शारदा के चरणों में अर्पित हुई तो पूरा वातावरण भक्ति श्रद्धा और भावनाओं से सराबोर हो उठा। यह यात्रा न केवल आस्था की पहचान बनी बल्कि यह संदेश भी दे गई कि सच्ची भक्ति में हर कठिनाई छोटी पड़ जाती है और मां के दरबार तक पहुंचने का रास्ता अपने आप सरल हो जाता है।

 

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