श्री श्री 1008 सिद्धपीठ दक्षिण मुखी बड़े हनुमान जी मंदिर में में उमड़ा आस्था का सैलाब: भव्यता और दिव्यता के साथ मनाया गया हनुमान प्राकट्य महोत्सव सात महाआरती की अलौकिक ज्योति बनी आकर्षण का केंद्र, सिद्धपीठ में श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़

कटनी। धर्म, आस्था और भक्ति के अद्वितीय संगम का साक्षी बना नगर, जहां श्री श्री 1008 सिद्धपीठ दक्षिणमुखी बड़े हनुमान जी मंदिर, कमानिया गेट में आयोजित हनुमान प्राकट्य महोत्सव पूरे हर्षोल्लास, गरिमा और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। तीन दिवसीय इस भव्य आयोजन में श्रद्धालुओं का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि पूरा मंदिर परिसर मानो आस्था के समुद्र में डूब गया हो।
महोत्सव के दौरान हर ओर जय श्रीराम और बजरंगबली की जय के जयघोष गूंजते रहे। सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मंदिर परिसर में देखी गईं, जहां हर कोई प्रभु श्री हनुमान जी के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उत्साहित नजर आया। विशेष श्रृंगार में विराजित हनुमान जी महाराज के दिव्य स्वरूप ने सभी भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
दिनभर चले विशेष पूजन-अर्चन में श्रद्धालुओं ने अपने-अपने तरीके से प्रभु की आराधना की और प्राकट्य उत्सव पर शुभकामनाएं अर्पित कीं। जैसे-जैसे शाम ढली, मंदिर परिसर की भव्यता और भी बढ़ती चली गई। चारों ओर आकर्षक रोशनी और दीपों की जगमगाहट ने वातावरण को दिव्य बना दिया।
महोत्सव की एक और विशेषता यह रही कि बच्चे, युवा, बुजुर्ग, महिलाएं एवं पुरुष—सभी वर्गों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई। सभी ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस महाउत्सव को मनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी और भगवान हनुमान जी के जन्मोत्सव को पूर्ण सम्मान के साथ मनाते हुए उन्हें अपनी भावपूर्ण बधाइयां अर्पित कीं।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा हनुमान जी के जीवन प्रसंगों पर आधारित झांकियों का मनमोहक प्रस्तुतीकरण भी किया गया। कहीं भगवान श्रीराम का स्वरूप देखने को मिला तो कहीं बाल स्वरूप हनुमान जी का सजीव चित्रण आकर्षण का केंद्र बना रहा। इन झांकियों ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया और भक्ति का वातावरण और अधिक प्रगाढ़ हो गया।
सबसे अद्भुत दृश्य सात महाआरती के दौरान देखने को मिला, जब एक साथ प्रज्वलित दीपों की अलौकिक लौ ने पूरे मंदिर परिसर को दिव्य प्रकाश से आलोकित कर दिया। उस क्षण की छटा इतनी मनमोहक थी कि हर श्रद्धालु उस दृश्य में खो गया और वातावरण में एक अद्वितीय आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार महसूस किया गया।
रात्रि में आयोजित भजन संध्या ने माहौल को और भी भक्तिमय बना दिया। बाहर से पधारे सुप्रसिद्ध भजन गायकों ने अपनी मधुर प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। मंदिर समिति के सदस्य, भक्तगण और आमजन सभी भक्ति रस में सराबोर नजर आए।
महोत्सव के समापन अवसर पर आज आयोजित विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
आस्था और चमत्कार का केंद्र – सिद्धपीठ बड़े हनुमान जी मंदिर
नगर का श्री श्री 1008 सिद्धपीठ दक्षिणमुखी बड़े हनुमान जी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और चमत्कारिक अनुभूतियों का जीवंत केंद्र है। यहां विराजित दक्षिणमुखी हनुमान जी की प्रतिमा अत्यंत दुर्लभ और सिद्धपीठ स्वरूप मानी जाती है। मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से की गई प्रार्थना शीघ्र फलित होती है और भक्तों के कष्ट दूर होते हैं। यही कारण है कि यहां प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं और संतोष के साथ लौटते हैं।
मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही एक अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को यहां होने वाले पूजन-अर्चन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
आस्था से सशक्त होती सामाजिक एकता
हनुमान प्राकट्य महोत्सव जैसे आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं होते, बल्कि ये समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं। नगर में आयोजित यह महोत्सव इस बात का प्रमाण है कि आज भी लोगों में आस्था के प्रति गहरा विश्वास है और वे एकजुट होकर अपनी परंपराओं को जीवित रखे हुए हैं।
आयोजित यह भव्य हनुमान प्राकट्य महोत्सव आस्था, भक्ति और सामाजिक समरसता का ऐसा अद्भुत उदाहरण बन गया, जिसे श्रद्धालु लंबे समय तक याद रखेंगे।

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