कटनी / सम्पूर्ण भारत वर्ष मे पुनः कक्षा पांचवी और कक्षा आंठवी को बोर्ड परीक्षा किए जाने पर विशेष सराहनीय पहल की गई .इसका विशेष प्रतिफल अर्जित किए छात्र छात्राओ ने आगे बढ़कर अच्छे परिणाम प्राप्त किए…
अक्षरनंदन विद्यालय के संस्थापक एंव डायरेक्टर अधिवक्ता अंनत पांडेय के मार्गदर्शन मे विद्यालय की प्राचार्या श्रीमति माडंवी पांडेय के दिशानिर्देशनुसार कक्षा पांचवी और कक्षा आंठवी के छात्राओ ने सबसे अधिक प्रतिफल अर्जित कर बाजी मारी छात्राओ का उत्साहवर्धन करते हुए कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमति मीना रजावत एंव समाजसेवी व अधिवक्ता रेखा अंजू तिवारी ने उपस्थित हुए सभी सम्मानित छात्र छात्राओ को शिक्षा का मूल मंत्र बताए हुए कहा कि .जो बच्चा शिक्षा की मुख्य धारा से जुडकर अच्छी तरह से पूरी ईमानदारी निष्ठा और लगन के साथ मिलकर पढाई लिखाई करता है…वो केवल अपने माता पिता का मान नही बढ़ाता वह पूरे परिवार समाज और देश का नाम रोशन करता है इसलिए शिक्षा ग्रहण करना अत्यन्त महत्वपूर्ण है क्योंकि ..शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो जितना पीयेगा वह उतनी ही तेजी से दहाडेगा…कार्यक्रम सर्वप्रथम मां भारतीय के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर मुख्य अतिथियों द्वारा आत्मीय द्वारा भव्य छात्र छात्राओ को प्रथम द्वितीय तृतीय स्थान प्राप्त करे वाले होनहार छात्र-छात्रों को गोल्ड मेडल पहनाकर उन्हे विभिन्न सामाजिक संगठनों के द्वारा प्रतियोगिताओं मे बढ़चढ़कर हिस्सा लिया और हौसलाअफजाई करते हुए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया.तत्पश्चात विद्यालय की प्राचार्या श्रीमति माडंवी पांडेय ने शासन प्रशासन की इस पहल की सराहनीय प्रंशसा की कक्षा पांचवी और आंठवी को पुनः बोर्ड घोषित किए जाने से बच्चो को आगे बढ़ने मे अब अधिक मेहनत करनी होगी और आगे चलकर अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। कार्यक्रम मे विशेष सराहनीय सहयोग विद्यालय के उप निदेशक कुलदीप पांडेय एंव सुश्री शारदा पांडेय मीडिया प्रभारी श्रीमति अर्चना गुप्ता,सुश्री रोशनी नायक,श्रीमति चंचल तिवारी,सुश्री शालिनी पांडेय , गणित विशेषज्ञ निहित सिंह सहित समस्त विद्यालय की सम्मानित शिक्षिको की मेहनत और लगन का प्रयास था….विद्यालय नई सोच और नयी तकनीक के साथ मिलकर शिक्षा कौशल विकास मे सहयोग प्रदान करेगा…
*अक्षरनंदन विद्यालय मे कक्षा 5 वीं आंठवी का परिणाम घोषित हुआ समाजसेवी व अधिवक्ता रेखा अंजू तिवारी ने छात्र छात्राओ का उत्साहवर्धन करते हुए शिक्षा का मूल मंत्र बताते हुए कहा कि…शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो जितना अधिक पीयेगा वह उतना ही तेजी से दहाडेगा*

