महाप्रभु श्री जगन्नाथ के महाप्रसाद के लिए उमड़ा आस्था का महासागर, हजारों श्रद्धालुओं ने पाया पुण्य लाभ,144वें रथयात्रा महोत्सव में उमड़ा आस्था का जनसैलाब

कटनी। 144वें श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव के पावन अवसर पर श्री जगदीश स्वामी मंदिर परिसर स्थित जगन्नाथ रसोई में आयोजित विशाल महाभंडारा श्रद्धा, सेवा और भक्ति का अद्भुत संगम बन गया। सुबह से ही महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी महाराज के दर्शन एवं महाप्रसाद ग्रहण करने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। पूरे दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने महाप्रभु का महाप्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य एवं कृतार्थ महसूस किया।
मंदिर परिसर “जय जगन्नाथ” के जयघोष, भजन-कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन से गुंजायमान रहा। श्रद्धालु भक्त पूरे श्रद्धाभाव से पंक्तिबद्ध होकर महाप्रभु के महाप्रसाद का लाभ लेते रहे। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ का महाप्रसाद सभी भेदभावों से परे समरसता, सेवा और सनातन संस्कृति का प्रतीक है। इसी भावना के साथ हर वर्ग और आयु के श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे की व्यवस्था अत्यंत सुव्यवस्थित रही। मंदिर समिति, ट्रस्ट एवं सैकड़ों सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने निस्वार्थ भाव से प्रसाद वितरण और श्रद्धालुओं की सेवा में अपना अमूल्य योगदान दिया। अनुमान है कि 25 हजार से अधिक श्रद्धालु इस दिव्य महाभंडारे में महाप्रभु का प्रसाद ग्रहण करेंगे। इस अवसर पर श्री जगदीश स्वामी मंदिर ट्रस्ट एवं मंदिर समिति ने सभी श्रद्धालुओं, दानदाताओं, सेवाभावी कार्यकर्ताओं एवं धर्मप्रेमी नागरिकों का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महाप्रभु श्री जगन्नाथ की असीम कृपा से यह विशाल धार्मिक आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो रहा है। कार्यक्रम को सफल बनाने में मंदिर समिति के अध्यक्ष प्रमोद सरावगी, रथयात्रा महोत्सव अध्यक्ष विजय ठाकुर सहित शिशिर टूहड़ा, शिवकुमार सोनी, पं. चंद्रिका प्रसाद दुबे, पं. उमेश दुबे, शंभू शरण मिश्र, मुरली मनोहर अग्रवाल, संतोष पांडे, विपिन दुबे, नरेश ताम्रकार, मनीष शर्मा, भारत गुप्ता, विनोद मिश्रा, राजेश तिवारी, विजय पटेल, राजेश पटेल, संजय गिरी, गोलू नामदेव, राजकुमार गुप्ता, रेशु टूहड़ा, हरिप्रसाद टीपा सहित अनेक सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने तन-मन से अपनी सेवाएं अर्पित कीं। महाप्रभु श्री जगन्नाथ की कृपा, भक्तों की अटूट आस्था और सेवा भाव से परिपूर्ण यह विशाल महाभंडारा 144वें श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव का सबसे दिव्य एवं अविस्मरणीय आकर्षण बन गया।

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