जबलपुर।केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, जबलपुर ने भारतीय डाक विभाग में जाली अंकसूचियों के आधार पर नौकरी हथियाने वाले 8 अभ्यर्थियों, अज्ञात लोकसेवकों तथा निजी बिचौलियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। फर्जी दस्तावेजों के सहारे योग्य और मेधावी युवाओं का हक मारना एक बेहद गंभीर सामाजिक अपराध है, जिसे लेकर ब्यूरो ने कड़ा रुख अपनाया है।
कार्रवाई एवं मामले के मुख्य बिंदु:
नामित आरोपी: मानवेन्द्र सिंह सिकरवार, बद्री प्रसाद यादव, देवेन्द्र सिंह चौहान, राजाबाबू अहिरवार, रमाकांत शर्मा, प्रदीप खरे, सौरभ शर्मा और नयन कुमार।
छापेमारी: एफआईआर दर्ज होते ही सीबीआई की 8 टीमों ने सभी आरोपियों के निवास स्थानों पर एक साथ छापेमारी कर महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य जब्त किए।
मोडस ऑपरेंडी: अभ्यर्थियों ने बिहार, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर व झारखंड के के फर्जी प्रमाण-पत्र अपलोड कर बढ़ा-चढ़ाकर अंक दर्शाए थे। बोर्ड सत्यापन में फर्जीवाड़ा पकड़े जाने पर विभाग ने इनकी अस्थाई नियुक्तियां रद्द कर दीं।
मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 420, 467, 468 एवं 471; भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 61(2), 318(4), 336(3), 338 एवं 340(2); तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (वर्ष 2018 में यथासंशोधित) की धारा 7 के अंतर्गत पंजीकृत किया गया है।
सीबीआई का कड़ा संदेश:
कूटरचित दस्तावेजों के दम पर सरकारी नौकरी पाना न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि समाज के प्रति एक बड़ा धोखा है। सीबीआई इस पूरे सिंडिकेट और इसकी जड़ों तक पहुंचने के लिए अत्यंत गहन जांच कर रही है। सरकारी भर्तियों में फर्जीवाड़ा करने वाले या कराने वाले किसी भी अपराधी एवं बिचौलिए के प्रति सीबीआई ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है
फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पाना गंभीर सामाजिक अपराध: जबलपुर में 8 आरोपियों पर सीबीआई की बड़ी कार्रवाई

