धान की फसल में कीट व्याधि की निगरानी तेज, खेतों में पहुंचकर किसानों को दे रहे तकनीकी सलाह कलेक्टर के निर्देश पर गांव-गांव पहुंचकर कृषि अमला कर रहा फसलों का निरीक्षण, भूरा माहू की रोकथाम के बताए उपाय

कटनी। जिले में धान की फसल को कीट एवं व्याधियों से बचाने के लिए कृषि विभाग द्वारा मैदानी स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है। कुछ क्षेत्रों में धान की फसल में कीट व्याधि का प्रभाव सामने आने के बाद कलेक्टर आशीष तिवारी ने कृषि विभाग के अधिकारियों एवं मैदानी अमले को गांवों में पहुंचकर फसलों का सतत निरीक्षण करने तथा किसानों को कीटों की पहचान, रोकथाम और नियंत्रण के संबंध में तकनीकी जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर के निर्देश के बाद कृषि विस्तार अधिकारी लगातार किसानों के खेतों का भ्रमण कर रहे हैं। इस दौरान फसल की स्थिति का जायजा लेने के साथ संभावित कीट एवं व्याधियों के प्रकोप की निगरानी की जा रही है। किसानों को फसल की स्थिति के अनुसार आवश्यक सावधानियां बरतने तथा समय पर नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है।
जल निकासी रखकर भूरा माहू से करें बचाव
कृषि विभाग ने किसानों को भूरा माहू की रोकथाम के लिए खेत में उचित जल निकासी रखने और खेत को दो-तीन दिन तक सूखा रखने की सलाह दी है। इसके साथ ही नाइट्रोजनयुक्त उर्वरक एवं यूरिया का अत्यधिक उपयोग नहीं करने तथा संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करने को कहा गया है। खेत की मेड़ों को घास एवं खरपतवार से मुक्त रखने की सलाह भी दी गई है।
प्रकोप होने पर अनुशंसित दवाओं में से किसी एक का करें उपयोग
कृषि विभाग के अनुसार भूरा माहू का प्रकोप दिखाई देने पर रासायनिक नियंत्रण के लिए एक समय में किसी एक अनुशंसित कीटनाशक का ही उपयोग किया जाना चाहिए। विभाग ने इनमू पायमेट्रोजिन 50 प्रतिशत डब्ल्यूजी 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर, डायनोटेफ्यूरोन 70 प्रतिशत डब्ल्यूजी 85 ग्राम प्रति हेक्टेयर, डायनोटेफ्यूरोन 20 प्रतिशत एसजी 250 ग्राम प्रति हेक्टेयर, डायनोटेफ्यूरोन 15 प्रतिशत डब्ल्यूजी + पायमेट्रोजिन 45 प्रतिशत डब्ल्यूजी 330 ग्राम प्रति हेक्टेयर, थायोमेथेक्जाम 25 प्रतिशत डब्ल्यूजी 100-120 ग्राम प्रति हेक्टेयर अथवा इमीडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल 200-250 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग की जानकारी दी है।
इसके अलावा फिप्रोनिल 3 प्रतिशत + ब्यूप्रोफेजिन 22 प्रतिशत 500 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर तथा ब्यूप्रोफेजिन 15 प्रतिशत + एसीफेट 35 प्रतिशत 50 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से भी उपयोग किया जा सकता है।
500 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर में करें छिड़काव
दवा के छिड़काव के दौरान प्रति हेक्टेयर 500 लीटर पानी का उपयोग करने की सलाह दी गई है। पौधों को दवा के घोल से अच्छी तरह गीला करना जरूरी बताया गया है, ताकि दवा का प्रभाव बेहतर हो सके। दवा के प्रभाव को बढ़ाने के लिए सिलिकॉन अथवा चिपको स्प्रेडर का उपयोग करने की सलाह भी कृषि विभाग ने दी है।
कृषि विभाग के मैदानी अमले द्वारा किसानों से कहा जा रहा है कि फसल में किसी भी प्रकार के कीट या व्याधि के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क करें और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही कीटनाशक का उपयोग करें। समय पर पहचान, सतत निगरानी और वैज्ञानिक नियंत्रण उपायों से धान की फसल को संभावित नुकसान से बचाया जा सकता है।

Please follow and like us:
Pin Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enjoy this blog? Please spread the word :)